तुम हो
एक स़हर निखरी सी..
नए सफ़र पर निकलने को..
एक किरण आशा सी...
नए रंग रूप दिखाने को..
एक धूप खिलती सी..
सूरज को देख चलते रहने को..
एक सांझ ढलती सी..
दिन कोे मुकाम तक पहुंचाने को..
एक रात गहरी अंधेरी सी..
पास आकर साथ रह जाने को..
एक लहर बेढंगी सी..
बह कर सागर में मिल जाने को..
तुम हो
एक सुवास बसंत सी..
हर कोने को खुशबू से भर जाने को..
एक फुहार पहली बारिश सी..
भिगा कर बहा ले जाने को..
एक दीपक जगमगाता सा..
भूले को राह दिखाने को..
एक तारा टिमटिमाता सा..
साथ चल कर हमराह बनने को..
एक सवाल अबूझ पहेली सा..
जवाब ढूँढने की कोशिश करवाने को..
एक आईना चमचमाता सा..
खुद के अक्स से मिलवाने को..
तुम हो
एक ख्याल खुशनुमा सा..
हर पल सोच के मुस्कुराने को...
एक ख्वाब खूबसूरत सा..
खुली आँखों से देखने को..
एक एहसास महकता सा..
आसपास महसूस करने को..
एक संगीत मद्धिम सा..
सांसों के साथ उठने गिरने को...
एक याद अतरंगी सी..
डूब के उसमें खुद को खोने को..
एक किताब अधखुली सी..
चोरी छिपे अक्सर पढ़ लेने को...