पिछला साल हर किसी को कुछ न कुछ दे गया. कहीं दुःख, कहीं याद, कहीं सुकून, कहीं जीवन संकट।
कुछ ने परिवार खोया कुछ ने रोजगार
कुछ ने हिम्मत खोयी कुछ ने व्यापार।
इस सब उथल पुथल ने जो एक बात अच्छी की, वो ये कि हमें परिवार की अहमियत रिश्तों की महत्ता समझ में आयी। त्योहार, व पर्व का इंतजार करते रहे हम। और क्योंकि उस समयावधि में कोई मंगल कार्य नहीं हो पाया तो २०२१ तो शादियों का सैलाब ही ले आया।
आजकल शादी का season चल रहा है. जिसे देखो या तो शादी plan कर रहा है, या शादी कर रहा है , या फिर इंस्टाग्राम पर शादी की तस्वीरें डाल रहा है. माता पिता भी
peer-pressure इस क़दर हावी है कि वो भी देखा-देखी बहती गंगा में हाथ धोने की होड़ में लगे हैं. सोशल मीडिया से लेकर Matrimony sites तक, फेसबुक से लेकर व्हाट्सप्प ग्रुप्स तक, यही माहौल चल रहा है.
चाहे रोज परिवार से बात करो या महीने में एक बार रिश्तेदारों से, लाख रूपये का सवाल यही है:
"भई! क्या सोचा है?"
"उम्र निकल रही है..."
"तुम्हारी कहीं बातचीत है तो बताओ नहीं तो हम बात चलाएं।"
दोस्तों से बात करो
तो किसी को लहंगा चुनने में दिक्कत आ रही है,
तो कोई ये सोच रहा है की शादी के बाद रोज किचन कैसे संभलेगा।
कोई ट्रांसफर की अर्जी दे रहा है
तो कोई ये सोचता है कि उसके कितने दोस्त शादी में आ पाएंगे.
यही जिक्र जब निकल पड़ता है तो मन ये सोचने लगता है कि मानव जीवन स्थिरता प्रदान करने की ये जो सामाजिक व्यवस्था है, उसके बारे में क्या हम कभी सोचते हैं.
समय बदला, मूल्य बदले, लेकिन विवाह का कोई दूसरा विकल्प हमें नहीं मिलता। विश्व की विभिन्न संस्कृतियों में भी शादी किसी के भी जीवन का एक महत्वपूर्ण आयाम है.
यदि मुझसे पूछा जाये कि शादी करनी है क्या?
मैं कुछ पल ठहर कर सोचने लगती हूँ..... कि क्या मुझे सच में शादी करनी है.....
परन्तु फिर इस समाज की प्रश्नवाचक मुखमुद्रा मुझे पुनः सोचने को मजबूर करती है.
तो चलिए एक छोटा सा प्रयास किया जाये कि आखिर मेरे आसपास के लोग जो शादी कर रहे हैं, उनके अनुभव व वजह, क्या वो साधारण वजहें मेरे लिए इतनी ख़ास हैं कि जीवन का इतना महत्त्वपूर्ण निर्णय मात्र एक जलसे के लिए किया जाये.
बहुत ज़ोर डाला अपने छोटे से मस्तिष्क पर, तो ये समझ पाया कि शायद अभी उतना भी परिपक्व नहीं हूँ मैं....
क्यों करनी है शादी मुझे?
मेरी वजहें बहुत साधारण हैं, पर बहुत जरूरी भी हैं. मेरे लिए तो काफी ज्यादा जरुरी.
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
Netflix का TV वाला सब्सक्रिप्शन लेने के लिए,
क्योंकि TV तो खुद लेने में कुछ नहीं है,
लेकिन 800 -900 रूपये हर महीने थोड़ा ज्यादती ही हो जाती है ,
तो वो 800 रूपये का बिल बांटने वाला चाहिये कोई साथ.....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
किसी महीने अगर मैं भावावेश में ज्यादा दान पुण्य कर लूँ ,
तो कोई परमानेंट बैंक होना चाहिए लोन देने को ,
जिसमें interest rate भी थोड़ा कम हो,
और बार -बार लोन मिल भी जाये बिना लिखा -पढ़त के ....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
खाना बनाने की दिक्कत नहीं है ,
पर बचपन से जो भाई -बहन के साथ एक ही थाली में खाने की आदत है ना,
वो अभी तक गई नहीं है,
तो एक थाली में खाना खाने को चाहिए कोई साथ....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
घर साफ़ सुथरा रहता है मेरा, पर किताबों के जो कार्टन भरे पड़े हैं ,
देख कर कोफ़्त होती है, और एक पैराग्राफ पढ़ने को,
पूरा कार्टन खाली करना पड़ता है,
तो किताबें पूरे घर में फैला कर रखने को चाहिए कोई साथ....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
शॉपिंग करना अच्छा लगता है, मोल भाव करना भी सिखाया है माता पिता ने ,
बस माँ जो खुद मेरे लिए कपड़े खरीद लाती थी न,
उसी आदत में आज तक खुद के लिए कुछ पसंद नहीं हो पाता है,
तो कपड़े पसंद करने को चाहिए कोई साथ....
मुझे चाहिए कोई साथ, लेकिन....
coffee पीने का शौक है मुझे और आदत भी है अब,
पिताजी के कितने ही डांटने के बाद भी ,
तो coffee maker, washing machine,
जैसे fancy appliances लेने के लिए साथ चाहिए,
क्योंकि सादे बर्तन तो बहुतेरे हैं मेरे पास ...
जरूरतें चाहे कितनी ही मामूली हों, पर लाज़िमी तो हैं. आश्चर्य इस बात का है कि जीवन के नए अध्याय की नींव रखते रखते हम इतने परिपक्व व जिम्मेदार बनने का प्रयास करने लगते हैं कि हम अपनी छोटी छोटी आकांक्षाओं को ही भुला देते हैं. समाज तो दिशा देते देते कहीं हम ही दिशा न भूल जाएं,ये डर अक्सर कचोटता है मन को.
पर क्या करें दिल तो बच्चा है न....
ऊपर लिखे सभी विचार काल्पनिक तो नहीं, परन्तु नादान हैं...
निजी विचार हैं, आनंद लें और
अगर कोई इस बायोडाटा के हिसाब से बात करने को इच्छुक हो तो अवश्य कमेंट करें.
हा हा हा हा हा ....
This is really cool 😂
ReplyDeleteBahut hi pyaara likha h 🌻
ReplyDeleteBhot khoob jr g
ReplyDeleteBhut shi
ReplyDeleteनशे का सेवन कम करें !
ReplyDeletebahut sundr vichar
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