Saturday, 17 July 2021

माँ

तू ही स्वर
तू ही अक्षर.
तू ही जीवन
तू ही चिंतन.

तू हर क्षण में
तू कण कण में.
तुझसे हूं मैं
तुझ तक हूं मैं.

तू ही रक्षक
तू ही शिक्षक.
तू ही परीक्षक
तू ही निरीक्षक.

तुझसे है ज्ञान
तुझसे पहचान.
तुझसे है मेरा सम्मान
तुझपे है सब कुछ कुर्बान.

चंदा तारे दिन के उजियारे
तेरे पहलू में बीतें ये सारे.
बरखा जाड़े, पतझण कारे
हर इक मुश्किल तुझसे हारे.

जो स्वप्न थे तेरे
बने मनोरथ मेरे.
तेरे व्रत उपवास अनेक
सफलता मेरी एक से एक.

तू रही हर फरियाद में
तू बचपन से हर याद में.
तू खट्टी मीठी स्वाद में
तू हर सीख सी बुनियाद में.

तू है एक अमोल उपहार
तेरे ही सब हैं उपकार.
तू ही सत्  चित् है साकार
"सृष्टि" का तू है आधार.

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