Saturday, 17 July 2021

अक्सर सोचता हूँ मैं

The achievements, the failures, the setbacks, the milestones whatever I am today is not just mine...It's the contribution of my parents, my family, as well...


अक्सर सोचता हूँ मैं
मृदु या कटु, जो शब्द मैं बोलता हूँ
सीधी या टेढ़ी, जो राह मैं चलता हूँ
सही या गलत, जो काम मैं करता हूँ, 
ये शब्द, ये राह, ये काम
सिर्फ मेरे नहीं तुम्हारे भी तो हैं
क्योंकि
मुझे बोलना सिखाया तुमने
मुझे रास्ता दिखाया तुमने
सही काम की प्रशंसा गलत पर थप्पड़
बचपन से ही मिलते आए हैं मुझे
पर वो प्रशस्ति, वो मार
सिर्फ मेरे नहीं तुम्हारे भी तो हैं
अक्सर सोचता हूँ मैं


अक्सर सोचता हूँ मैं
वो सुबह मुझसे पहले उठ के
प्रभात का अर्थ बताया था तुमने
वो दिन भर मेहनत करके
नमक से भी रोटी खाना सुख से
निष्ठा के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिए
पूरे मन से कर्म करने का सबक सिखाया तुमने
मेरी उपलब्धियां, मेरी सफलताएं
सिर्फ मेरे नहीं तुम्हारे भी तो हैं
अक्सर सोचता हूँ मैं


अक्सर सोचता हूँ मैं
सादा जीवन उच्च विचार
सिर्फ कहा नहीं, जिया और जीना सिखाया तुमने
ईश्वर से डरने को नहीं, प्रेम करने को कहा तुमने
हालातों से छिपने के बजाय लड़ने को कहा तुमने
हारा मैं, गिरा मैं, चोट खायी, फिर संभला भी मैं
पर मेरी हार, मेरी चोट और एक बार फिर मेरी जीत
सिर्फ मेरे नहीं तुम्हारे भी तो हैं
अक्सर सोचता हूँ मैं.

2 comments:

  1. Beautifully written. बहुत अच्छा लिखा है श्रृष्टि ।

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