अगर जीवन में सब कुछ पूर्व निर्धारित हो, जैसा सोचा हो वैसा ही हो जाए तो जीवन की अनिश्चितता का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
हम यह सोच कर बैठें कि, आज के दिन काम स्वयं हो जाएगा, और यदि वह काम हो भी जाए ठीक उसी प्रकार, तो जीवन का विशेष लाभ नहीं उठा पाएंगे हम.
बात तो तब है जब सारी तैयारियाँ धरी रह जाएं और एक विपरीत परिस्थिति हमारे समक्ष मुँह खोले आ जाए और हम उसी गर्मजोशी से उस विपरीत परिस्थिति का स्वागत करें.
यही तो शिवता है, जब जैसी परिस्थिति उपस्थित हो, तब उसी प्रकार ढल जाएं।
समुद्र मंथन में एक और कालकूट विष को कंठ में धारण किया दूसरी ओर सृष्टि का संहार कर नए सृजन को जन्म देना इतना आसान कार्य नहीं. बहुत विश्वास व ढृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता पड़ती है किसी भी निर्णय को लेने में। परन्तु उसी एक निर्णय को सटीक व उचित निर्णय बनाने के लिए अधिक त्याग व आत्मावलोकन चाहिए।
कठिन परिस्थितियों में जब एक आम मनुष्य यदा कदा झुंझला उठता, परेशान हो जाता है, तो दूसरी ओर विशिष्ट प्रतिभा व ढृढ़ इच्छाशक्ति का अपरिमित भण्डार लिए वही मनुष्य उन्हीं परिस्थितियों में विजय घोष के साथ पूरे भूमण्डल को गौरवान्वित करता है।
और उसके इस कृत्य अथवा कार्य के लिए यदि कोई जिम्मेदार है, तो वो है सिर्फ उसका विश्वास।
हार मान लेना यूँ कठिन समय में सबसे सुगम व आसान मार्ग है, और जीतने के लिए संघर्ष करना तनिक दुर्गम पर आनंद तो जीतने में ही है.
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